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पंच-तत्व

भगवान चैतन्य

पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, पश्चिम बंगाल में भारत के सबसे असाधारण धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सुधारक प्रकट हुए। उनका नाम श्री चैतन्य था, और वे आधुनिक हरे कृष्ण आंदोलन के संस्थापक है। श्री चैतन्य महाप्रभु, जिन्हें कई विद्वानों और धर्मविदों द्वारा भगवान कृष्ण के अवतार के रूप में माना जाता है, ने भारत के प्राचीन वैदिक साहित्य के आधार पर एक क्रांतिकारी आध्यात्मिक आंदोलन की शुरुआत की।

नित्यानन्द प्रभु

वैष्णव संप्रदाय के महान आचार्य नरोत्तम दास ठाकुर कहते है, कि जब कोई नित्यानंद प्रभु के चरणकमलों का आश्रय लेता है तो लाखों चंद्रमाओं की सुखद चांदनी उसे मिल जाती है। यदि कोई वास्तव में राधा-कृष्ण की अंतरंग लीलाओं मे प्रवेश चाहता है, तो उसे दृढ़ता से उनके चरणकमलों को पकड़ना चाहिए। कलि-युग की उम्र में, भगवान कृष्ण इस भौतिक संसार में भगवान चैतन्य महाप्रभु के रूप में बलराम के साथ, जो कि भगवान नित्यानंद के रूप में हैं, अवतरित होने की घोषणा करते हैं।