|| हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे ||

आगामी त्यौहार

(English) Patotsav – 2019

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(English) Culture Camp – 2019 (Summer Camp)

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(English) Prime Minister Of India’s Visit

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मंदिर अनुसूचीमंदिर अनुसूची

मंदिर अनुसूची

श्रील प्रभुपाद

कृष्ण कृपामूर्ति ए. सी. भक्तिवेन्द्र स्वामी प्रभुपाद का जन्म 1896 में भारत के कलकत्ता में हुआ था। उन्होंने पहली बार 1922 में कलकत्ता में अपने आध्यात्मिक गुरु, श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती गोस्वामी से मुलाकात की। भक्तिसिद्धांत सरस्वती, जो एक प्रमुख भक्ति विद्वान और गौडिया मठों (वैदिक संस्थान) की चौंसठ शाखाओं के संस्थापक थें, को यह शिक्षित नवयुवक पसंद आया और उन्होंने उन्हें अपना जीवन पश्चिमी दुनिया में वैदिक ज्ञान सिखाने के लिए समर्पित करने के लिए आश्वस्त किया। श्रील प्रभुपाद उनके शिष्य बने और ग्यारह साल बाद (1933) इलाहाबाद में, वह औपचारिक रूप से उनके दीक्षित शिष्य बन गए।

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